Anubhav (Making of Chavanprash)
Monday, October 17, 2011 12:35From the pages of Diary :
मैंने कुछ माह पूर्व ही सोच लिया था की में इस बार अकेला ही चवनप्राश बनाऊंगा परन्तु भारत इस बार भी मेरे साथ share करना चाहता था. परन्तु मैंने कुछ % की बात की तो वेह भी दूर हट गये. परन्तु इस बार मेरे पास पैसो की अत्यधिक तंगी थी. लगता नही था की यह कार्य पूर्ण हो पायेगा परन्तु भगवन जी की कृपया से सभी कार्य समय अनुसार ठीक से होते गये.
आंवलो के लिए सर्वप्रथम मैंने Karnal मंडी में पूछा तोह लगभग 12rs का भाव था. 3 तारिक को में व् बहादुर संधू की किरमिच व् नजदीक के गाँव में भी गये परन्तु कोई काम नही बना अंतत : 5 तारिक को Reck से आंवलो की 5rs प्रति किलो क भाव से व्यवसाय हुआ. लगभग 15kg आंवले 5rs के भाव से Reck से खरीदे और लगभग 33kg आंवला 4.50 के भाव से मंडी से खरीदा. उसी दिन रात्री में लगभग 35kg. आंवला Karnal ले आया व् सुबह भारत और मनोज दोनों 15kg. आंवला ले कर आये. परन्तु यहाँ से vicky ने 1000rs. देने की बात हुई थी वह व्यवस्था नही हो पायी और उस दिन काम शुरू नही हो सका भारत वापिस चला गया. इसी दिन रात्री तक मम्मी ने 800rs. व् मिनाक्षी की मम्मी ने 300rs. व् हरीश जी ने 300rs. का वादा किया. 7 तारीख को प्रात : मैंने संजय को 1kg. लकडिया 100rs की उत्तम टाल से लेकर दी फिर में पंडित हरबन लाल से द्रव्ये लेने गया वहां मैंने सभी द्रव्ये अलग अलग पर्ची डाल कर लिए जहाँ से मैं 1.30 पर फ्री हुआ. तब तक भारत भी पानीपत से आ चूका था. घर आ कर हमने भोजन किया आंवले ख़राब न हो इसलिए मैंने 6 तारीख को उन्हें पानी में डाल कर रखा हुआ था. इसके पश्चात हम हरीश जी से पैसे ले कर गुड़ मंडी में गये वहां से तिल तेल व् पोलाथीन खरीदे. फिर वापसी पर किसान देरी से घी खरीदा. रास्ते में एक साइकिल वाले ने टक्कर भी मारी परन्तु भगवन की कृपया से घी बहुत कम गिरा और बच गया. फिर चौहान से शहद लिया सेठी से 35kg. चीनी व् सरदाना से 7kg. चीनी ली. नवीन टेंट से 2 पतीले व् राज स्वीट से खोंचा लिया.सांय 6.30 भारत मंदिर हो कर आये. आकर हमने आंवले उतार दिए व् पानी छान लिया, आंवले अलग कर लिए. फिर हमने क्वात के लिए 106 ltr. पानी डाल कर उसमे सभी द्रव्ये डाल दिए. इसके पश्चात भोजन किया. फिर हमने पिस्टी निकाली शुरू की परन्तु काफी देर मेहनत करने के बाद बहुत कम पिस्टी निकली ! काफी देर मेरे दिमाग में आता रहा की आंवलो को एक बार फिर से उबाला जाये परन्तु सभी इन्कारते रहे ! इसी बीच नए-2 experiment करते रहे जैसे juicer में आंवले डाल कर पिस्टी निकालने की कोशिश की ! Mixy में डाल कर पिस्टी बनाने की कोशिश की ! द्वरी सोटा से भी कोशिश की परन्तु कोई भी कामयाब न हुआ ! रात्री के लगभग 11 बजे हमने आंवलो को फिर से उबाला व् पानी बीच में ही रहने दिया और गरम – गरम आंवलो को जाली पर रगड़ने लगे जिससे पिस्टी का कार्य तेजी से होने लगा ! जो पानी आंवलो से बचा वह भी हमने कवाथ में डाल दिया ! लगभग प्रात: 4 बजे हमने पिस्टी भूनना आरम्भ किया! सर्वप्रथम घी व् तिल तेल डाला ! अच्छी तरह गर्म होने पर धीरे धीरे पिस्टी डाली इसमें कम से कम 3 व्यक्तियों की आवश्यकता रहती है एक पिस्टी गलने वाला , 2 मिलाने वाले. यह कार्य बहुत ही सावधानीपूर्वक करना पड़ता है अन्यथा छींटे लग सकती है . पिस्टी भूनते हुए अग्नि की तरफ ख़ास ध्यान रखना आवश्यक है.अन्यथा चिपक सकती है या तेज होने पर छींटे मार सकती है जिस से नुकसान हो सकता है धीमी धीमी अग्नि जलाए. जिसमे धुआं बिलकुल न हो अन्यथा काम करने में दिक्कत रहती है पिस्टी भूनते समय शरीर को पूर्णतय ढांप लेना आवश्यक है क्यूंकि बुलबुले फूटते है व् छींटे मारते है जो गरम होने पर शरीर क किसी भी अंग को जला सकते है पिस्टी भूनते समय 3 व्यक्तियों की तो कम से कम आवश्यकता रहती है यदि अग्नि माध्यम हो तो पिस्टी भूनने में लगभग 7-8 घन्टे लगते है
पिस्टी चूल्हे पर रखने के बाद हमने क्वात की तरफ ध्यान दिया व् अग्नि तीव्र कर दी. ये दोनों कार्य लगातार चलते रहे क्वात जब चतुर्थाश शेष अर्थात 28-30 kg. रह गया तब इसे उतार लिया इसे 4 गुना मोती तह वाले मलमल क कपडे से छान लिया इसे फिर से अग्नि पर रख कर इसमें 42 kg. चीनी डाल कर चाशनी क लिए रख दिया. चाशनी तैयार होने पर हमने परीक्षा की एक गिलास में पानी भर कर ऊपर से एक बूँद चाशनी की टपकाई वह सीधी नीचे जाकर बैठ जाती थी घुलती नही थी हाथ पर 2 तारे आती थी लगभग 12.30 पर पिस्टी भी भुनकर तैयार हो गयी उसका रंग हल्का भूरा अर्थात मटियाला रंग था तथा वह घी छोढ़ रही थी अब दोनों को बड़ी सावधानीपूर्वक मिलाया. जग से चाशनी को पिस्टी में धीरे-धीरे मिलाया. 2 व्यक्ति mixing करते रहे. एक व्यक्ति जग से डालता था जब तक एक जग नही mix होता था तब तक दूसरा नही डालते थे. इस प्रकार पूरी चाशनी मिला दी बाद में taste किया तो खटास महसूस हुई तब हमने 6kg. चीनी की चाशनी बना कर उसमे मिला दी व् ठंडा होने के लिए रख दिया. लगभग 3 बजे दोपहर से उसे हिलाते रहे और रात्री के 8 बजे तक खूब हिलाया व् रात्री भर ठंडा होने क लिए रखा सुबह काफी देर हिलाने के बाद प्रक्षेप द्रव्य मिलाने प्रारंभ किये . वंश लोचन निश्चित मात्रा से अग्र मात्रा में डालना चाहिए. शेष द्रव्य पूरण मात्रा में ही डाले और सभी द्रव्यों को पूर्णता : पीस कर बारीक ही डाले . कोई पदार्थ waste न जाने सके . तब चवनप्राश की सुगंध व् स्वाद उत्तम बनता है इस तरह चवनप्राश बनकर तैयार हो गया व् बाद में packing करके बेचना प्रारंभ किया. जहाँ तक संभव हो सके packing डिब्बो व् शीशियो में ही करे.!
